नई दिल्ली। दुनिया भले ही तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही हो, लेकिन सनातन जीवनशैली की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है। योग, आयुर्वेद, शुद्ध आहार, और आध्यात्मिकता जैसी सनातन परंपराएं न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई चेतना का संचार कर रही हैं। यह जीवनशैली न केवल भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है।
सनातन जीवनशैली का अर्थ है प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर जीना। यह जीवन दर्शन वेदों और उपनिषदों पर आधारित है, जिसमें आहार, विचार, व्यवहार और ध्यान को महत्व दिया गया है। ‘यथा अन्नं तथा मनं’ के सिद्धांत के तहत शुद्ध और सात्विक आहार को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना गया है।
आयुर्वेद, जो विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है, सनातन जीवनशैली का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद के अनुसार, जीवन का उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करना है। योग, जो आज विश्वभर में लोकप्रिय हो चुका है, शरीर और मन को एकीकृत करने की प्राचीन पद्धति है।
पतंजलि योगसूत्र के अनुसार, योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है।
सनातन जीवनशैली हमें रासायनिक उत्पादों से दूर रहकर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने की प्रेरणा देती है। चाहे वह मिट्टी के बर्तन हों, बिलोना विधि से तैयार घी हो, या फिर पंचगव्य से जुड़े उत्पाद—इनका उपयोग न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है।
आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच, लोग सनातन जीवनशैली की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ध्यान, प्रार्थना और भक्ति, जिनका महत्व सनातन धर्म में सदियों से बताया गया है, अब मानसिक शांति पाने के साधन बन गए हैं।
सनातन जीवनशैली अब भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसका उदाहरण है, जो भारत की प्राचीन परंपरा को वैश्विक मंच पर ले गया। साथ ही, आयुर्वेदिक उत्पादों और भारतीय मसालों की बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब सनातन ज्ञान और जीवनशैली को अपनाने के लिए तैयार है।
सनातन परंपराएं न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पर्यावरण के लिए भी वरदान हैं। गाय के गोबर से बने उत्पाद, यज्ञ में उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक तत्व, और जैविक खेती इस जीवनशैली के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हैं।
आधुनिकता के दौर में जहां तनाव और बीमारियों ने मनुष्य को घेर लिया है, सनातन जीवनशैली शांति, संतुलन और स्वास्थ्य की राह दिखाती है। यह जीवनशैली केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति और आत्मा के बीच एक सेतु है, जो मनुष्य को उसके असली उद्देश्य से जोड़ती है।
(डेस्क रिपोर्ट, देशपक्ष)
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