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अमेरिका की नई टैरिफ नीति: भारत समेत कई देशों पर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन, 5 मार्च: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक व्यापार पर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक टैरिफ) लागू करेगा, जिससे उन देशों पर भी उतने ही टैरिफ लगाए जाएंगे, जितने वे अमेरिका पर लगाते हैं। इस निर्णय का सीधा असर भारत, चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों पर पड़ सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार पर असर

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, “भारत हम पर 100 प्रतिशत ऑटो टैरिफ लगाता है। अब अमेरिका भी उतना ही टैरिफ लगाएगा।” इससे भारतीय उत्पादों, खासकर ऑटोमोबाइल, स्टील और टेक्सटाइल उद्योग पर असर पड़ सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापार वार्ता हुई थी, जिसमें टैरिफ विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी। लेकिन ट्रंप के इस नए फैसले के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

चीन, मैक्सिको और कनाडा पर भी असर

ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा कि चीन अमेरिका पर दोगुना और दक्षिण कोरिया चार गुना टैरिफ लगाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब से उन देशों पर उतने ही टैरिफ लगाएगा, जितने वे अमेरिका पर लगाते हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योग को फायदा?

ट्रंप के इस फैसले को अमेरिका में घरेलू उत्पादकों के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यह नीति अमेरिकी व्यापार संतुलन को सुधारने और घरेलू रोजगार बढ़ाने में मदद करेगी।

ट्रंप ने कहा, “हमने अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत किया है। अमेरिका अब अपने लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है।”

भारत के लिए आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस नई नीति के तहत अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता तेज करनी होगी। भारतीय निर्यातकों को अब नए बाजारों की तलाश करनी होगी, ताकि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके।

निष्कर्ष:
ट्रंप की यह घोषणा वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर डाल सकती है। भारत समेत कई देशों को अब इस टैरिफ युद्ध से बचने के लिए रणनीतिक कदम उठाने होंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को हल कर पाएंगे।

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