भारत
भारतदिल्ली

कांग्रेस की ‘टो्ट बैग राजनीति’ और 1984 की काली छाया

प्रियंका गांधी वाड्रा की हालिया ‘टो्ट बैग राजनीति’ कांग्रेस की दोहरी सोच और पाखंड को उजागर करती है। बीते कुछ दिनों से प्रियंका गांधी ऐसे बैग लिए घूम रही हैं, जिन पर “फिलिस्तीन” और “बांग्लादेश के हिंदू और ईसाइयों के साथ खड़े हो” जैसे संदेश लिखे हैं। यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों और वैश्विक मुद्दों के प्रति चिंतित है। लेकिन सच्चाई यह है कि कांग्रेस का यह कदम केवल दिखावा है, खासकर जब इसके अपने अतीत पर नजर डाली जाए।

बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने इस पाखंड को बेनकाब करते हुए प्रियंका गांधी को “1984” लिखा हुआ बैग भेंट किया। यह कदम कांग्रेस के काले इतिहास—1984 के सिख विरोधी दंगों—की याद दिलाता है। ये दंगे न केवल कांग्रेस की असफलता थे, बल्कि इसकी सक्रिय भूमिका भी उजागर करते हैं, जिसमें अल्पसंख्यकों पर बर्बर अत्याचार किए गए।
1

प्रियंका गांधी जब विदेशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करती हैं, तब भारत के सिख समुदाय को 1984 के उन भयावह दिनों की याद आ जाती है। हजारों निर्दोष सिखों की हत्या के लिए जिम्मेदार कांग्रेस नेताओं को बचाने का काम भी कांग्रेस ने ही किया। इस भयावह इतिहास के बाद कांग्रेस किस मुंह से अल्पसंख्यकों की हिमायती होने का दावा कर सकती है?

चुनिंदा सहानुभूति का खेल

यह विडंबना ही है कि कांग्रेस को फिलिस्तीन या बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की पीड़ा तो दिखती है, लेकिन कश्मीरी पंडितों के पलायन, 1984 के सिख नरसंहार और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर उसकी चुप्पी बरकरार रहती है। प्रियंका गांधी के बैग सिर्फ राजनीतिक दिखावा हैं, जो कांग्रेस की असली मंशा को छिपा नहीं सकते।

सिर्फ प्रतीकवाद, कोई ठोस काम नहीं


कांग्रेस की राजनीति प्रतीकों और नारों तक ही सीमित है। प्रियंका गांधी के टो्ट बैग सुर्खियां तो बटोर सकते हैं, लेकिन यह कांग्रेस के इतिहास में किए गए अन्याय और उसके नेतृत्व की विफलता को नहीं छिपा सकते। इसके उलट, बीजेपी ने अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस काम किया है।

जवाबदेही जरूरी है

अपराजिता सारंगी द्वारा प्रियंका गांधी को दिया गया “1984” बैग कांग्रेस के लिए एक जरूरी संदेश है। कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। अपनी गलतियों का हिसाब दिए बिना कांग्रेस कभी भी नैतिक ऊंचाई का दावा नहीं कर सकती।

आज के भारत में, जहां काम शब्दों से ज्यादा मायने रखते हैं, कांग्रेस का पाखंड फिर से उजागर हो गया है। जनता सब देख रही है, और 1984 के दाग कांग्रेस के दामन से कभी नहीं मिट सकते।

Leave A Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Related Posts

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से हालात खतरनाक, GRAP-IV लागू

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गंभीर श्रेणी में दर्ज होने के बाद सरकार ने GRAP-IV (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया है। इसके तहत कई सख्त कदम उठाए गए हैं ताकि प्रदूषण पर…

Load More Posts Loading...No More Posts.