प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को याद करते हुए उनके साथ बिताए गए संवादों को बेहद आत्मीयता से साझा किया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. सिंह के साथ हुई नियमित बातचीत का उल्लेख करते हुए, मोदी ने उनकी दूरदर्शिता और सादगी की प्रशंसा की।
राजनीति से परे एक सकारात्मक संवाद
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह जी की विनम्रता और उनके गहरे ज्ञान ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी। हमारे बीच हुई हर बातचीत एक सीखने का अनुभव थी।” यह स्मरण न केवल दोनों नेताओं के बीच के रिश्ते को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीति से परे संवाद और आदान-प्रदान कितना महत्वपूर्ण है।
डॉ. सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए, मोदी ने गुजरात के विकास से जुड़े मुद्दों पर उनके साथ कई बैठकें कीं। मोदी ने बताया, “वे हमेशा धैर्यपूर्वक मेरी बातें सुनते थे और राजनीति से ऊपर उठकर व्यावहारिक सलाह देते थे।”
मनमोहन सिंह: सादगी और दूरदर्शिता का प्रतीक
डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी सादगी, विद्वता और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है। 1990 के दशक में भारत के आर्थिक सुधारों के शिल्पकार के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। पीएम मोदी ने उनकी इसी दूरदर्शिता को नमन करते हुए कहा, “इतने ऊंचे पद पर रहकर भी उनकी सादगी और विनम्रता अद्वितीय थी।”
लोकतंत्र में सम्मान की परंपरा
प्रधानमंत्री मोदी की यह भावपूर्ण श्रद्धांजलि दर्शाती है कि लोकतंत्र में विचारधाराओं से परे व्यक्तित्व और योगदान को सम्मानित करना कितना आवश्यक है। आज के ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल में, यह संदेश राजनीतिक संवाद में गरिमा और आदर को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
मोदी और सिंह, दोनों ही भारत के इतिहास के दो अलग-अलग युगों और शैलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। फिर भी, मोदी द्वारा व्यक्त किया गया यह सम्मान बताता है कि ज्ञान, सादगी और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण का मूल्य हमेशा स्थायी रहेगा।
पीएम मोदी के इस वक्तव्य को जनता और राजनीतिक विश्लेषकों से भरपूर सराहना मिल रही है। यह न केवल उनके उदार दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि भारतीय राजनीति में सकारात्मकता और सहयोग की परंपरा को भी बल प्रदान करता है।






















