दिल्ली

पृथ्वीराज चव्हाण की AAP की जीत पर भविष्यवाणी, संदीप दीक्षित की तीखी प्रतिक्रिया, कांग्रेस की अंदरूनी कलह तेज

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। जहां एक ओर महाराष्ट्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत की संभावना जताई है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में कांग्रेस के उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस मामले ने न केवल दिल्ली बल्कि देशभर में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

Congress Leader Prithviraj Chavan

पृथ्वीराज चव्हाण की AAP के समर्थन में टिप्पणी

8 जनवरी को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव इस बार काफी अहम है। मेरा मानना है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी एक बार फिर जीत हासिल कर सकती है। यदि AAP और कांग्रेस का गठबंधन होता, तो यह और भी बेहतर होता। हालांकि, वर्तमान में ऐसा होते हुए नहीं दिख रहा है।” उनके इस बयान ने कांग्रेस पार्टी के भीतर असहमति की स्थिति को उजागर किया है।

संदीप दीक्षित का तीखा विरोध

पृथ्वीराज चव्हाण के बयान के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की। दीक्षित ने कहा, “अगर कोई कांग्रेस का वरिष्ठ नेता इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना बात करता है, तो उसे पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो जाना चाहिए।” संदीप दीक्षित की यह टिप्पणी कांग्रेस में असंतोष को और बढ़ावा देती है, खासकर जब पार्टी दिल्ली चुनाव में अपनी रणनीति को लेकर संघर्ष कर रही है।

इंडिया गठबंधन और AAP का समर्थन

दिल्ली चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों ने अब तक AAP का खुलकर समर्थन किया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) ने भी AAP के पक्ष में अपनी समर्थन की घोषणा की है। इसके बावजूद, कांग्रेस का दिल्ली चुनाव में अकेले लड़ने का निर्णय और पार्टी के अंदरूनी मतभेदों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।

संदीप दीक्षित और कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेद

कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, खासकर जब वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण का बयान पार्टी के लिए ही परेशानी का कारण बन गया है। कांग्रेस के नेताओं के बीच इस बात को लेकर गहरी असहमति देखी जा रही है कि क्या पार्टी को AAP से गठबंधन करना चाहिए या अकेले ही चुनावी मैदान में उतरना चाहिए।

शिवसेना और अन्य दलों का रुख

उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे ने भी यह स्वीकार किया है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बेहतरीन काम किया है और उन्हें एक बार फिर जीत मिल सकती है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी दिल्ली में AAP के पक्ष में खड़ी हुई हैं। इन दलों के समर्थन ने AAP की स्थिति को मजबूत किया है, लेकिन कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस की चिंता और AAP का मजबूत पक्ष

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके सहयोगी दल अब AAP को ही प्रमुख खिलाड़ी मान रहे हैं। कांग्रेस के अंदर का विभाजन और पार्टी की चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं के इस प्रकार के बयान आने से पार्टी की एकता पर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, AAP की स्थिति मजबूत होती जा रही है, जिसके कारण दिल्ली में सत्ता की बयार एक बार फिर केजरीवाल के पक्ष में बहती दिखाई दे रही है।

दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के लिए यह एक कठिन समय है, जहां वह अपनी रणनीतियों को लेकर दुविधा में है।

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