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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती: माता-पिता की सहमति होगी अनिवार्य

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस बिल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। खासकर, बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर इसमें कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

Social Media Use for Child

बिल के मुख्य प्रावधान

1. बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नियंत्रण

बिल के तहत, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट खोलने के लिए माता-पिता या अभिभावक की सहमति अनिवार्य होगी।

  • प्रभाव: यह प्रावधान बच्चों को ऑनलाइन खतरों, साइबर बुलिंग, और अनुचित सामग्री से बचाने में मदद करेगा।

2. डेटा संग्रह और इस्तेमाल पर प्रतिबंध

सोशल मीडिया कंपनियां और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बच्चों से संबंधित डेटा को एकत्र करने या उसका व्यावसायिक उपयोग करने से पहले स्पष्ट सहमति लेनी होगी।

  • डेटा का सुरक्षित भंडारण: बच्चों के डेटा को विदेश में स्टोर करने पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

3. जुर्माने का प्रावधान

यदि कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

  • जुर्माने की सीमा: उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर जोर

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

आजकल बच्चे कम उम्र में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने लगे हैं। यह न केवल उनकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि उन्हें कई ऑनलाइन खतरों का भी सामना करना पड़ता है।

  • ऑनलाइन गेम्स और साइबर बुलिंग: कई ऑनलाइन गेम्स और प्लेटफॉर्म बच्चों में हिंसक व्यवहार और नशे की लत पैदा कर सकते हैं।
  • अनुचित सामग्री का एक्सपोजर: बिना किसी नियंत्रण के, बच्चे अनुपयुक्त सामग्री देख सकते हैं, जो उनके विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

माता-पिता की भूमिका

यह नया प्रावधान बच्चों के डिजिटल अनुभव पर माता-पिता को अधिक नियंत्रण और जिम्मेदारी देगा।

  • संभालने की जिम्मेदारी: माता-पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे केवल सुरक्षित और उपयुक्त प्लेटफॉर्म्स का ही उपयोग करें।

बिल की आलोचना और चुनौतियां

तकनीकी अड़चनें

  • सोशल मीडिया कंपनियां कैसे सुनिश्चित करेंगी कि उपयोगकर्ता की उम्र सही है?
  • सहमति की प्रक्रिया को सुचारू और बिना रुकावट के कैसे लागू किया जाएगा?

डेटा सुरक्षा बनाम गोपनीयता

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का डेटा सुरक्षा के नाम पर माता-पिता या सरकार के हाथों में देना उनकी गोपनीयता का हनन कर सकता है।


अन्य महत्वपूर्ण पहलू

  • डेटा उपयोग की पारदर्शिता: प्लेटफॉर्म्स को यह स्पष्ट करना होगा कि वे उपयोगकर्ताओं का डेटा कैसे एकत्र और उपयोग करते हैं।
  • डेटा हटाने का अधिकार: उपयोगकर्ताओं को उनके डेटा को हटाने का अधिकार दिया जाएगा।

निष्कर्ष

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का यह प्रावधान बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसकी प्रभावी क्रियान्वयन और संभावित चुनौतियों का समाधान सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

इस बिल के लागू होने से यह उम्मीद है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिक जिम्मेदारी से कार्य करेंगे और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे।

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