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नेहरू के पत्र लौटाएं… सोनिया के पास 51 डिब्बों का रहस्य!, PM म्यूजियम ने राहुल को लिखी चिट्ठी

प्रधानमंत्री संग्राहलय की और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक चिट्ठी लिखी गई है। चिट्ठी लिखकर पंडित जवाहर लाल नेहरू के खत को वापस करने को कहा है। ये लेटर पीएम म्यूजियम और पुस्तकालय (PMML) सोसाइटी के सदस्य रिजवान कादरी ने राहुल को लिखी है।

रिजवान कादरी ने अपने लेटर में राहुल गांधी को लिखा है- यूपीए के शासनकाल में साल 2008 में 51 डिब्बों में भर कर नेहरु के व्यक्तिगत पत्र सोनिया गांधी के पास पहुंचाए गए थे। अब इन चिट्ठियों को लाइब्रेरी को वापस कर दें।

रिजवान कादरी ने चिट्ठी में क्या लिखा? 

कादरी ने अपनी चिट्टी में आगे लिखा है,  2008 में तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह पीएमएमएल से वापस ले लिया गया था। हम समझते हैं कि ये दस्तावेज ‘नेहरू परिवार’ के लिए व्यक्तिगत महत्व रखते होंगे। मगर पीएमएमएल का मानना है कि ये ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज हैं और इन तक पहुंच आवश्यक है।

https://twitter.com/ANI/status/1868518094853009482

सोनिया गांधी से भी की थी लेटर लौटाने की मांग

कादरी ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि सितंबर 2024 में भी मैंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि 2008 में नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय से वापस लिए गए 51 डिब्बों को लौटा दिए जाएं या हमें उन्हें देखने और स्कैन करने की अनुमति दी जाए या फिर उनकी एक प्रति हमें प्रदान की जाए ताकि हम उनका अध्ययन कर सकें। इस पर अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। तो मैंने विपक्ष के नेता और उनके बेटे राहुल गांधी से उन्हें वापस लाने में हमारी मदद करने का अनुरोध किया। हमें उम्मीद है कि विपक्ष के नेता के रूप में वे इस पर गौर करेंगे और इसे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराएंगे।”

नेहरू ने किसके नाम लिखी थी चिट्ठी

बता दें कि नेहरू ने ये चिट्टी अपने शासनकाल में जयप्रकाश नारायण, बाबू जगजीवन राम, एडविना माउंटबेट, पद्मजा नायडू, विजया लक्ष्मी पंडित, अरुणा आसफ और गोविंद बल्लभ समेत अन्य भारतीय इतिहास से संबंधित लोगों के कई महत्वपूर्ण पत्र वहां थे। रिजवान कादरी ने बताया कि ये लेटर जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल ने 1971 में नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी (अब पीएमएमएल) को दिए थे। बता दें कि15 जून, 2023 नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी’ रखने का फैसला किया गया था।

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